शिक्षा का महत्व पर निबंध | Shiksha Ka Mahtav Par Nibandh

Shiksha Ka Mahtav Par Nibandh: देश में शिक्षा का महत्व क्या है और एक मनुष्य के लिए शिक्षा का महत्व क्या है। उसके बारे में आज हम बात करने वाले हैं। शिक्षा का क्या महत्व होता है। इस पर निबंध के रूप में संपूर्ण जानकारी आप तक पहुंचाने वाले हैं। आज का आर्टिकल जिसमें हम शिक्षा का महत्व पर निबंध (Shiksha Ka Mahtav Par Nibandh) आपको उपलब्ध करवाएंगे।

Shiksha Ka Mahtav Par Nibandh

Shiksha Ka Mahatav Par nibandh
Shiksha Ka Mahatav Par nibandh

शिक्षा का महत्व पर निबंध (250 Word)

जीवन मे सफलता पाने के लिए और जीवन मे कुछ अच्छा करने के लिए सभी के जीवन मे शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षा महिलाओ और पुरुषो दोनों के जीवन मे शिक्षा एक समान रूप से आवश्यक होता है। शिक्षा के बिना हम सभी का जीवन ऐसे लगता है जैसे कि बिना नींव की ईमारत हो। हमें अपने देश की प्रगति चाहते है, तो देश का हर एक व्यक्ति शिक्षित होना बहुत जरूरी होता है।

पहले के ज़माने मे लोग शिक्षित नहीं होते थे, इसलिये वह व्यक्ति आज भी बेरोजगार है। क्योंकि शिक्षित ना होने के वजह से उनको कही नौकरी नहीं मिलती है। शिक्षा ग्रहण करने का मतलब यह नहीं है कि शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने के लिए करते है, बल्कि शिक्षा ग्रहण करने से हमें बहुत चीज़ो का ज्ञान होता है। क्योंकि विद्यायल को पवित्र मंदिर माना जाता है, और पवित्र मंदिर मे शिक्षक को गुरु के रूप मे माना जाता है। और हर एक गुरु अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देता है, वह अपने बच्चो को सच के मार्ग मे चलने का ज्ञान अवश्य देता है।

बच्चो के जीवन पहले गुरु उनके माता -पिता होते है। उनके द्वारा ही बच्चो को शिक्षा दी जाती है। उनके माता -पिता उनको ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाते है, और बोलना भी सिखाते है और पहला शब्द बच्चे माँ ही बोलते है। बच्चो के जन्म से लेकर उनके पालन -पोषण करने की जिम्मेदारी माता -पिता की होती है। फिर जैसे -जैसे बच्चे बड़े होते है वैसे-वैसे उनको शिक्षा ग्रहण करने के लिये विद्यायल भेजा जाता है, और विद्यायल मे शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञानो के लिये नहीं पढ़ाया जाता है बल्कि व्यक्ति के जीवन के अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिये भी किया जाता है।

हम सभी के जीवन मे शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है,आज के समय मे हर एक लड़का और लड़की हो शिक्षित होना बेहद जरूरी है। क्योंकि हम कभी भी कही पर जॉब के लिये जाते है, तो हमारी शिक्षा जरूर पूछी जाती है। उसी के आधार पर नौकरी दी जाती है। जीवन मे जॉब करने के लिये शिक्षित होना बहुत जरूरी होता है, बिना शिक्षा के लोग बेरोजगार बैठे रहते है। इसलिये हर एक व्यक्ति को पढ़ाई -लिखाई जरूर करनी चाहिए।

शिक्षा का महत्व पर निबन्ध (800 word)

शिक्षा का अर्थ

शिक्षा ज्ञान ,उचित आचरण, तकनीकी दक्षता, विघा आदि को पाने की प्रक्रिया को कहते हैं। शिक्षा मे ज्ञान ,उचित आचरण, तकनीकी दक्षता ,शिक्षण और विघा प्राप्ति आदि समाविष्ट हैं। शिक्षा के द्वारा ही समाज मे व्यक्ति एक पीढी से दूसरी पीढ़ी को अपने ज्ञान का हस्तांतरण करती हैं। शिक्षा शिक्षण संस्था के रूप में कार्य करते हैं।

यह एक कडी की तरह कार्य करती हैं। यह एक पीढी को दूसरी पीढ़ी से पीढ़ी दर पीढ़ी जोडे रखती हैं। समाज की संस्कृति की निरंतरता को बनाए रखती हैं। बच्चा शिक्षा के द्वारा ही समाज के मूल्य,अपने कर्तव्य, प्रतिमान रीति-रिवाजों आदि को सीखता हैं। बच्चा तभी समाज से जुड पाता हैं। जब उसे समाज के इतिहास के बारे में ज्ञात हो। शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करने की प्रक्रिया हैं। शिक्षा के द्वारा ही आदमी समाज और देश मे अपने भूमिका निभाने के लिए काबिल बनता हैं। शिक्षा ही आदमी को अच्छा नागरिक तथा एक अच्छा सामाजिक प्राणी बनाती हैं। शिक्षा व्यक्ति को आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करती हैं।

शिक्षा का अर्थ ही है। सीखने और सिखाना इस प्रकार सीखने व सिखाने की कला को ही शिक्षा कहते हैं। शिक्षा का व्यापक अर्थ किसी समाज में चलने वाली सउद्देश्य चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया हैं। जिसके द्वारा व्यक्ति अपने दायित्व, कर्तव्य,समाज के मूल्य,प्रतिमानो से अवगत होता हैं। शिक्षा व्यक्ति को सुयोग्य नागरिक बनाती हैं। व्यक्ति प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखता और सिखाता रहता हैं। जिससे उसका दिन -प्रतिदिन का व्यवहार प्रभावित होता हैं। यह सीखना- सिखाना उसका पत्र-पत्रिका,समारोह,उत्सव सामाजिक सम्मेलनों जैसे औपचारिक साधनों से होता हैं और यह सब शिक्षा के व्यापक अर्थ में सम्मिलित होते हैं। शिक्षा का संकुचित अर्थ किसी समाज में किसी निश्चित समय व निश्चित स्थान (स्कूल, कॉलेज) पर सउद्देश्य व सुनियोजित ढंग से चलने वाली सीखने सिखाने की प्रक्रिया है। जिसमें व्यक्ति निश्चित पाठों को पढ़कर परीक्षाओं मे पास होना सिखता हैं।

शिक्षा के प्रकार

शिक्षा तीन प्रकार की होती हैं।

1.औपचारिक शिक्षा

2.निरौपचारिक शिक्षा

3. अनौपचारिक शिक्षा

1.औपचारिक शिक्षा-

स्कूल ,विद्यालय तथा महाविद्यालय में चलने वाली शिक्षा को औपचारिक शिक्षा कहते हैं। इसके अंतर्गत निश्चित पाठ्यक्रम,उद्देश्य व परीक्षाएं सभी निश्चित होते हैं। इसमें सीखने वाले को विद्यालय, महाविद्यालय के समय सारणी के अनुसार चलना पड़ता हैं। इसमें परीक्षा लेने और प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था होती हैं। शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है,कि यह व्यक्ति ,समाज और राष्ट्र की आवश्यकता की पूर्ति करती हैं। यह व्यक्ति के ज्ञान और कौशल का विकास करती हैं। इसके द्वारा व्यक्ति उधोग, व्यवसाय मैं कार्य करने योग्य बनता हैं। इस तरह की शिक्षा में धन ,समय व ऊर्जा की अधिक खपत होती हैं।

2.निरौपचारिक शिक्षा-

निरौपचारिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा की भांति विधालय ,महाविद्यालय, विश्वविधालय की सीमा मे नही बंधी होती हैं। परन्तु औपचारिक शिक्षा की तरह इसके भी उद्देश्य ,पाठ्वस्तु ,निश्चित होते हैं। परंतु औपचारिक शिक्षा बहुत ज्यादा ही निश्चित होती हैं और इसकी व्यवस्था बहुत ज्यादा लचीली होती हैं। इसमे सबकुछ शिक्षा प्राप्त करने वाले की सुविधा के अनुसार सुनिश्चित किया जाता हैं। उसकी सुविधा के अनुसार ही शिक्षा दिए जाने का स्थान व समय सुनिश्चित किया जाता हैं। प्रौढ़ शिक्षा,सतत शिक्षा,दूरस्थ शिक्षा,खुली शिक्षा यह सब कार्यक्रम निरौपचारिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं।

3.अनौपचारिक शिक्षा-

यह वह शिक्षा प्रणाली है। जिसके अंदर कुछ भी निश्चित नहीं होता हैं। इसके पाठ्यवस्तु,कुछ भी निश्चित नहीं होते हैं। यह शिक्षा जीवन भर चलती रहती है। क्योंकि मनुष्य प्रतिक्षण कुछ न कुछ सीखता हैं। मनुष्य अपनी प्रथम अनौपचारिक शिक्षा अपने घर पर ही प्राप्त करता हैं। जब वह विद्यालय में आता है, तो आप पहले से ही अनौपचारिक शिक्षा सिखा एक व्यक्ति होता हैं।

निष्कर्ष

आज के युग में यदि इंसान पढ़ा लिखा ना हो तो उसे हर चीज में दिक्कत होती हैं। यह हर इंसान के जीवन के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी हैं। आजकल गरीब से गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर बड़ा अफसर बनाने का सपना देखता हैं। अगर कोई बच्चा ठान ले तो मेहनत और लगन के साथ पढ़कर डॉक्टर,वकील, इंजीनियर कुछ भी बन सकता हैं। आज के समय में यदि व्यक्ति पढ़ा लिखा ना हो तो उसे सम्मान प्राप्त नहीं होता हैं।

आज की शिक्षा प्रणाली की एक बहुत ही गलत बात है। यह बहुत ज्यादा महंगी होती हैं। हर किसी के लिए इसे प्राप्त करना उनकी हैसियत से बाहर होता हैं। आज के समाज में बहुत से ऐसे लोग हैं। जो बेटे को पढ़ाते हैं, लेकिन बेटी को नहीं। उन सभी को शिक्षा का महत्व बताने की आवश्यकता हैं। क्योंकि शिक्षा हर व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं। चाहे वह लड़का हो या लड़की कोई भी हो। शिक्षा लिंग ,जाति, आयु नहीं देखती शिक्षा सभी के लिए समान रूप से होनी चाहिए।

अंतिम शब्द

वर्तमान समय में शिक्षा का महत्व हर इंसान के लिए जरूरी है। हर इंसान का शिक्षित होना बहुत ही अनिवार्य है। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का शिक्षित होना भी अनिवार्य है। क्योंकि शिक्षा के बिना किसी भी कार्य को सही ढंग से करना काफी मुश्किल हो जाता है। शिक्षित इंसान की अलग पहचान होती है। आज के इस आर्टिकल में हमने शिक्षा का महत्व पर निबंध (Shiksha Ka Mahtav Par Nibandh) आपके सामने उपलब्ध करवाया है। हमें उम्मीद है, कि हमारे द्वारा लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से जुड़ा कोई सवाल है तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है।

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